संपादकीय हंसता मुखड़ा, रोता अंतरा! लेखक: नया बिहार 9 जुलाई 2026 2 व्यूज़ संक्षेप देखकर ठहर जाएं, तो मालूम होगा कि श्रम बल में भागीदारी बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटी है। लेकिन बारीकी में जाएं, तो सकारात्मक कथानक में मौजूद कई गंभीर कमियां उजागर होने लगती हैं। शेयर करें: Facebook X WhatsApp संबंधित ख़बरें संपादकीय मंशा ही नहीं है 9 जुलाई 2026 संपादकीय फुटबॉल पर लगा दाग 9 जुलाई 2026 📰 संपादकीय हाफिज सईद का कांटा 9 जुलाई 2026