संक्षेप देखकर ठहर जाएं, तो मालूम होगा कि श्रम बल में भागीदारी बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटी है। लेकिन बारीकी में जाएं, तो सकारात्मक कथानक में मौजूद कई गंभीर कमियां उजागर होने लगती हैं।