नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को प्राचीन
नालंदा विश्वविद्यालय की प्रतिकृति मुहर भेंट कर सम्मानित किया।
नालंदा। विश्व प्रसिद्ध नालंदा की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
उठाया गया है। बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बुधवार को नव नालंदा महाविहार के सांस्कृतिक परिसर
स्थित ह्वेन त्सांग स्मारक का भ्रमण किया। इस दौरान नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर
सिद्धार्थ सिंह ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन का स्वागत करते हुए प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की प्रतिकृति
मुहर भेंट कर सम्मानित किया। भ्रमण के दौरान कुलपति सिद्धार्थ सिंह ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को चीनी
बौद्ध यात्री एवं महान विद्वान आचार्य ह्वेन त्सांग के जीवन, भारत यात्रा, नालंदा में अध्ययन और बौद्ध दर्शन के
वैश्विक प्रसार में उनके ऐतिहासिक योगदान की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही ह्वेन त्सांग स्मारक परिसर के
निर्माण, भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों और इसकी ऐतिहासिक महत्ता से भी अवगत कराया।
कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि प्राचीन नालंदा महाविहार केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया
के लिए ज्ञान, अनुसंधान और सांस्कृतिक संवाद का सबसे बड़ा केंद्र था। आज नव नालंदा महाविहार उसी
गौरवशाली परंपरा को आधुनिक समय में आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। यहां बौद्ध अध्ययन, पालि, संस्कृत,
दर्शन, प्राचीन इतिहास, भारतीय ज्ञान परंपरा, पांडुलिपि संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय शोध जैसे विषयों पर शिक्षा एवं
अनुसंधान संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल को यह भी जानकारी दी कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम्
मिशन के तहत नव नालंदा महाविहार को प्रथम क्लस्टर सेंटर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, जिसके अंतर्गत
प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
कुलपति ने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि पटना संग्रहालय में सुरक्षित आचार्य ह्वेन त्सांग के पवित्र
अवशेष को भविष्य में ह्वेन त्सांग स्मारक परिसर में स्थापित करने का प्रस्ताव है। इससे नालंदा अंतरराष्ट्रीय
बौद्ध श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र बन
सकेगा। राज्यपाल ने परिसर में प्रदर्शित ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया और नव नालंदा महाविहार द्वारा
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं बौद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए भावी योजनाओं के लिए
हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर नालंदा डीएम, पुलिस अधीक्षक, जिला प्रशासन के वरिष्ठ
अधिकारी, महाविहार के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
